Nathmal Ji Ki Haveli
नाथमल जी की हवेली – जैसलमेर की शिल्पकला का अद्भुत नमूना
राजस्थान के जैसलमेर में स्थित नाथमल जी की हवेली (Nathmal Ji Ki Haveli) 19वीं सदी की बेहतरीन वास्तुकला और शिल्पकला का उत्कृष्ट उदाहरण है। यह हवेली अपनी अनूठी डिजाइन, सुंदर नक्काशी और राजस्थानी परंपरा के लिए पर्यटकों के बीच बेहद प्रसिद्ध है।
इतिहास और निर्माण
- नाथमल जी की हवेली का निर्माण 19वीं सदी में कराया गया था।
- इसे दो वास्तुकार भाईयों ने मिलकर बनाया था, लेकिन उन्होंने हवेली का निर्माण दोनों ओर से अलग-अलग शुरू किया।
- परिणामस्वरूप, हवेली में एक अद्भुत सममितीय (symmetrical) डिजाइन दिखाई देती है, जो इसे विशेष बनाती है।
वास्तुकला की खासियतें
नाथमल जी की हवेली की डिज़ाइन और सजावट राजस्थानी कला की समृद्ध परंपरा को दर्शाती है।
1. बारीक नक्काशी और चित्रकला
- हवेली की दीवारों पर बनी मिनीएचर शैली की पेंटिंग्स बेहद आकर्षक हैं।
- हर पेंटिंग में उस समय की संस्कृति, लोककथाएँ और जीवनशैली की झलक दिखाई देती है।
2. पीले बलुआ पत्थर पर कलाकारी
- हवेली के निर्माण में पीले बलुआ पत्थर का प्रयोग किया गया है, जो इसे जैसलमेर की “स्वर्ण नगरी” की पहचान से जोड़ता है।
- हवेली के बाहरी हिस्से पर विशाल पत्थर के हाथी (mighty tuskers) उकेरे गए हैं, जो इसकी भव्यता को और बढ़ाते हैं।
पर्यटकों के लिए खास आकर्षण
- हवेली के हर कोने में राजस्थानी संस्कृति की झलक मिलती है।
- यहां की अनूठी नक्काशी, भित्तिचित्र और भव्य सजावट इतिहास प्रेमियों और कला प्रेमियों के लिए खास अनुभव प्रदान करते हैं।
- यह हवेली जैसलमेर के मुख्य पर्यटन स्थलों में से एक है।
स्थान और समय
- स्थान: मंडी चौक, जैसलमेर, राजस्थान
- समय: सुबह 9:00 बजे से शाम 6:00 बजे तक
- सर्वश्रेष्ठ समय: अक्टूबर से मार्च
निष्कर्ष
नाथमल जी की हवेली जैसलमेर की वास्तुकला, कला और संस्कृति का बेजोड़ संगम है।
यदि आप जैसलमेर की यात्रा कर रहे हैं, तो इस हवेली की नक्काशीदार दीवारें, मिनीएचर पेंटिंग्स और भव्य डिज़ाइन आपको जरूर मंत्रमुग्ध कर देंगी।
