Salim Singh Ki Haveli
सलीम सिंह की हवेली – जैसलमेर की शान और शिल्पकला का अद्भुत नमूना
जैसलमेर की ऐतिहासिक हवेलियों में से एक सलीम सिंह की हवेली (Salim Singh Ki Haveli) अपनी अनोखी वास्तुकला, शानदार नक्काशी और रहस्यमयी इतिहास के लिए प्रसिद्ध है। यह हवेली 18वीं सदी की पहली छमाही में बनवाई गई थी और आज भी पर्यटकों के बीच एक प्रमुख आकर्षण बनी हुई है।
इतिहास और निर्माण
- इस हवेली का निर्माण 18वीं सदी की पहली छमाही में सलीम सिंह ने करवाया था, जो उस समय जैसलमेर के प्रधानमंत्री (प्रधान सेनापति) थे।
- हवेली का एक हिस्सा आज भी मूल निवासियों के वंशजों के पास है और वे उसी में रहते हैं।
- यह हवेली अपनी अनूठी डिज़ाइन और बेहतरीन शिल्पकला के लिए मशहूर है।
वास्तुकला की विशेषताएँ
1. मोर के आकार की खूबसूरत नक्काशी
- हवेली की ऊँची मेहराबदार छत बेहद आकर्षक है, जो मोर के आकार के खूबसूरती से तराशे गए ब्रैकेट्स पर टिकी हुई है।
- यह डिज़ाइन हवेली को राजस्थानी कला और परंपरा से गहराई से जोड़ता है।
2. नष्ट की गई दो मंज़िलें
- लोककथाओं के अनुसार, इस हवेली में पहले दो अतिरिक्त लकड़ी की मंज़िलें थीं।
- हवेली की ऊँचाई उस समय के महाराजा के महल के बराबर हो गई थी।
- कहा जाता है कि महाराजा को यह पसंद नहीं आया और उन्होंने ऊपरी दो मंज़िलें गिराने का आदेश दिया।
3. राजस्थानी और मुगल शैली का अनोखा संगम
- हवेली की खिड़कियों, झरोखों और दीवारों पर की गई नक्काशी में राजस्थानी शिल्पकला के साथ-साथ मुगल शैली की झलक भी दिखाई देती है।
पर्यटकों के लिए खास आकर्षण
- हवेली की छत से जैसलमेर शहर का 360° पैनोरमिक व्यू अद्भुत अनुभव प्रदान करता है।
- यहाँ के झरोखे, छतरियाँ, मेहराबें और बारीक नक्काशी कला प्रेमियों को मंत्रमुग्ध कर देती हैं।
- हवेली का ऐतिहासिक महत्व और इसके पीछे की कहानियाँ और किंवदंतियाँ पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र हैं।
स्थान और समय
- स्थान: मंडी चौक, जैसलमेर, राजस्थान
- समय: सुबह 9:00 बजे से शाम 6:00 बजे तक
- सर्वश्रेष्ठ समय: अक्टूबर से मार्च
निष्कर्ष
सलीम सिंह की हवेली जैसलमेर की संस्कृति, वास्तुकला और इतिहास का एक अद्भुत प्रतीक है।
अगर आप जैसलमेर की यात्रा पर हैं, तो इस हवेली की मोर की नक्काशी, मेहराबदार छत और अनूठी डिज़ाइन जरूर देखनी चाहिए।
