JAISALMER FORT – Golden Fort
जैसलमेर किला – स्वर्ण नगरी का स्वर्णिम गहना
राजस्थान के थार मरुस्थल के हृदय में बसा जैसलमेर किला दुनिया के सबसे शानदार किलों में से एक है। इसे स्थानीय लोग “सोनार किला” या “स्वर्ण किला” भी कहते हैं, क्योंकि यह सुनहरे बलुआ पत्थरों से निर्मित है, जो सूरज की रोशनी में सोने की तरह दमकता है।
इतिहास और वास्तुकला
जैसलमेर किला का निर्माण भाटी राजपूत शासक महारावल जैसल सिंह ने वर्ष 1156 ईस्वी में करवाया था।
- किला पीले बलुआ पत्थरों से बना है, जो दिन के अलग-अलग समय पर रंग बदलते हैं।
- इस किले की दीवारें, दरवाजे और बारीक नक्काशी स्थानीय कारीगरों की शिल्पकला का अद्भुत उदाहरण हैं।
- राजपूती वास्तुकला, ऊँचे बुर्ज, विशाल प्राचीर और झरोखे इसकी भव्यता को और भी बढ़ाते हैं।
“सोनार किला” का नाम क्यों?
जैसलमेर किले को “सोनार किला” इसलिए कहा जाता है क्योंकि:
- यह पीले बलुआ पत्थर से बना है, जो सूरज की रोशनी में सोने जैसा चमकता है।
- खासकर सूर्यास्त के समय यह किला सुनहरी आभा से दमकने लगता है, जो पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देता है।
विश्व धरोहर स्थल
जैसलमेर किला को यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल का दर्जा प्राप्त है। यह भारत की शान और जैसलमेर की पहचान है।
किले के भीतर मंदिर, हवेलियाँ, महल और संकरी गलियाँ हैं, जो आपको राजपूती संस्कृति और इतिहास की झलक दिखाते हैं।
साहित्य और सिनेमा में पहचान
जैसलमेर किला केवल इतिहास और वास्तुकला के लिए ही नहीं, बल्कि साहित्य और सिनेमा के लिए भी प्रसिद्ध है।
- प्रख्यात फिल्मकार सत्यजित राय की मशहूर फेलूदा सीरीज़ की कहानी “सोनार केला” इसी किले पर आधारित है।
- इस पर बनी फिल्म ने किले को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई।
घूमने का सबसे अच्छा समय
- अक्टूबर से मार्च का समय जैसलमेर किला घूमने के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है।
- इस दौरान मौसम सुहावना होता है और सूर्यास्त के समय किले की सुनहरी आभा का नज़ारा अद्भुत लगता है।
निष्कर्ष
जैसलमेर किला केवल एक ऐतिहासिक धरोहर नहीं, बल्कि राजपूती शौर्य, संस्कृति और कला का जीता-जागता उदाहरण है।
अगर आप जैसलमेर घूमने आते हैं, तो सोनार किला देखे बिना आपकी यात्रा अधूरी मानी जाएगी।
